दिल्ली बन चुकी है जहरीली गैसों का चैम्बर !! केजरीवाल के मास्क शो से नहीं सुधरेगी हालत - See Latest
दिल्ली बन चुकी है जहरीली गैसों का चैम्बर !!  केजरीवाल के मास्क शो से नहीं सुधरेगी हालत

दिल्ली और एनसीआर की हालत अब एक गैस चैम्बर में बदल चुकी है, दिल्ली में एयर एमेर्जेंसी भी घोषित हो चुकी है फिर भी नवंबर महीने की शुरुआत में किसी तरह का सुधर होने की बजाय हर घंटे हालत ख़राब होते जा रहें है | इस तरह के जहरीले वातावरण में दिल्ली और आस पास की जनता के स्वास्थय पर ना सिर्फ बुरा प्रभाव पद रहा है बल्कि देश की राजधानी होने के नाते दिल्ली विश्व की सबसे प्रदूषित राजधानी बनने का भी मुकाम हासिल कर चुकी है | दिल्ली के मुख़्यमंत्री जहाँ अपने चुनावी प्रचार के लिए स्कूलों में मास्क बांटते नजर आ रहे हैं वही राष्ट्रीय स्तर की NGT संस्था जिसकी जिम्मेदारी सिर्फ वातावरण सम्बंधित सुरक्षा का ध्यान रखना है कुछ बड़े कदम नहीं उठा पा रही है |

दिल्ली में सांस लेना भी खतरनाक ! केजरीवाल मास्क शो में व्यस्त

अक्टूबर महीने एक अंतिम सप्ताह और नवंबर महीने के शुरुआत में जिस तरीके से अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ी है उसमे 30  प्रतिशत से ज्यादा को सिर्फ दिल्ली के जहरीले वातावरण का नुक्सान उठाना पड़ा है | दिल्ली का एयर क्वॉलिटी इंडेक्स 2 नवंबर को काफी खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका था, जिसका सीधा असर ना सिर्फ आम लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है बल्कि आने वाली पीढ़ी भी ग्रस्त होती जा रही है |
इन सबके बीच ना सिर्फ दिल्ली सरकार और दिल्ली के मुख्यमंत्री की जिम्मेवारी तथा केंद्रीय स्तर पर स्वास्थय विभाग की भी जिम्मेदारी बनती है | एक तरफ जहाँ दिल्ली सरकार ओड- इवन लाने से दिल्ली की जनता को लुभाने की कोशिस कर रही है वहीँ सीधा सीधा निशाना पडोशी राज्यों पर भी डाला जा रहा है |

ये भी सच है की पडोशी राज्यों हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की तरफ से भी पराली जलाने से लेकर कंस्ट्रक्शन आदि की रोकथाम के कामो में कमी नहीं आयी है, लेकिन इन सबको लेकर केजरीवाल सरकार के मास्क बांटने, महिलाओं को डीटीसी बसों में फ्री सेवा देकर सिर्फ अपनी जिम्मेवारी से भागती नजर आ रही है | दिल्ली में अब पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी जैसे हलात हो गए हैं, जिसका सीधा मतलब है हवा का स्तर इतना खतरनाक हो चुका है कि अब वह आम लोगों को भी प्रभावित करेगा. जिन लोगों को दमे की शिकायत और हार्ट प्रॉब्लम है तो ये प्रदूषण उनके लिए और खतरनाक है. ऐसी खराब एयर क्वॉलिटी के चलते अस्पताल में लोगों की इमरजेंसी विजिट बढ़ जाती है.

सामान्य लोगों के सीने में शिकायत होती है कि वो अच्छी तरह से सांस नहीं ले पा रहे हैं. बुजुर्ग और बच्चों में इन्फेक्शन का डर रहता है. ज्यादा बीमार रोगी को वेंटीलेटर तक लगाना पड़ता है. प्रदूषण पर स्टडी बताती है कि जब भी प्रदूषण बढ़ता है अस्पताल में मरीजों की संख्या भी बढ़ जाती है. एयर क्वॉलिटी इंडेक्स अब खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है कि अब इसका सीधा असर आम लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है. प्रदूषण एक साइलेंट किलर की तरह है. यह एक मेडिकल इमरजेंसी की तरह है जिसमें मरीज को सांस की तकलीफ है या फिर उसे हार्ट की समस्या है तो वह तकलीफ बढ़ेगी.  

मास्क बांटकर दिल्ली का वातावरण नहीं सुधरेगा -

kejriwal mask show

अगर आप भी जहरीली हवा में सांस ले रहे हैं तो मास्क पहनना जरूरी है , पर दिल्ली सरकार का मास्क बांटने से वातावरण साफ़ हो जायेगा इस तरह की उम्मीद आपको नहीं लगानी चाहिए |  'हर साल की तरह इस बार भी ऐसी स्थिति में एम्स में मरीजों की संख्या करीब 20% बढ़ जाती है. मास्क कुछ हद तक प्रदूषण को रोकने, अंदर  जाने से रोकता ही पर यह समाधान बिलकुल नहीं है

दिल्ली छोड़ना बनता जा रहा है एक बेहतर विकल्प-

स्वास्थय सम्बन्धी वैज्ञानिकों का मानना है की दिल्ली जैसे जहरीले वातावरण में रहने से गर्भवती महिला और अस्थमा पीड़ित बच्चों पर सबसे ज्यादा जान का खतरा रहता है | जहरीले प्रदूषण के बढ़ने पर ऐसे मरीजों की तकलीफ हर पल बढ़ती जाती है| एक रिपोर्ट के अनुशार दिल्ली में रहने वाले कई सांस के मरीज प्रदूषण बढ़ने पर दिल्ली छोड़ कर चले जाते हैं हैं और यह एक धब्बे के अलावा कुछ नहीं है |