देश में 34 सालों बाद हुए स्कूल-कॉलेज व्यवस्था में ये बड़े बदलाव, मोदी सरकार ने नई शिक्षा नीति को दी मंजूरी

भारत में तकरीबन 34 साल बाद नई शिक्षा नीति लागू होने जा रही है| मोदी सरकार ने नई शिक्षा नीति को भी मंजूरी दे दी है| 29 जुलाई यानी आज बुधवार को कैबिनेट की बैठक में इसपर फैसला लिया गया है| कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी, उन्होंने बताया कि 34 साल बाद भारत की नई शिक्षा नीति आई है जिसके तहत स्कूल-कॉलेज की व्यवस्था में बड़े बदलाव किए गए हैं| नया अकादमिक सत्र सितंबर-अक्टूबर में शुरू होने जा रहा है और सरकार का प्रयास पॉलिसी को इससे पहले लागू कर दिया जाए|

प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में नई शिक्षा नीति को मंजूरी दी गई है| भारत में पिछले 34 साल से शिक्षा नीति में कोई परिवर्तन नहीं हुआ था|  केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने शिक्षा नीति को लेकर 2 समितियां बनाई थीं| एक टीएसआर सुब्रमण्यम समिति और दूसरी डॉ. के कस्तूरीरंगन समिति बनाई गई थी|

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आगे की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के लिए बड़े स्तर पर सलाह ली गई जिसमें 2.5 लाख ग्राम पंचायतों, 6600 ब्लॉक्स, 676 जिलों से सलाह की गई| सरकार की ओर से बताया गया कि नई शिक्षा नीति के तहत कोई छात्र एक कोर्स के बीच में अगर कोई दूसरा कोर्स करना चाहे तो पहले कोर्स से सीमित समय के लिए ब्रेक लेकर कर सकता है| सरकार की ओर से बताया गया कि नई नीति को लेकर एक व्यापक चर्चा की गई है जिसमें शामिल सभी लोगों की सलाह ली गई कि आप नई नीति में क्या बदलाव चाहते हैं| उच्च शिक्षा में हम 2035 तक ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो में 50 फीसदी तक पहुंचेंगे| इसके लिए मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम लाई जा रही है| सरकार की ओर से बताया गया कि आज की व्यवस्था में 4 साल इंजीनियरिंग पढ़ने के बाद या 6 सेमेस्टर पढ़ने के बाद अगर कोई छात्र आगे नहीं पढ़ सकता है तो उसके पास कोई उपाय नहीं है| छात्र आउट ऑफ द सिस्टम हो जाता है| नए सिस्टम में ये रहेगा कि एक साल के बाद सर्टिफिकेट, दो साल के बाद डिप्लोमा, तीन या चार साल के बाद डिग्री मिल सकेगी| 

सरकार ने बताया कि मौजूदा शिक्षा नीति के तहत फिजिक्स ऑनर्स के साथ केमिस्ट्री, मैथ्स लिया जा सकता है. इसके साथ फैशन डिजाइनिंग नहीं ली जा सकती थी| लेकिन नई नीति में मेजर और माइनर की व्यवस्था होगी| जो मेजर प्रोग्राम हैं उसके अलावा माइनर प्रोग्राम भी लिए जा सकते हैं| इसके दो फायदे होंगे| आर्थिक या अन्य कारण से जो लोग ड्रॉप आउट हो जाते हैं वो वापस सिस्टम में आ सकते हैं| इसके अलावा जो अलग-अलग विषयों में रूचि रखते हैं, जैसे जो म्यूजिक में रूचि रखते हैं, लेकिन उसके लिए कोई व्यवस्था नहीं रहती है| नई शिक्षा नीति में मेजर और माइनर के माध्यम से ये व्यवस्था रहेगी| 

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